उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मानसून की आफत लगातार जारी है। मूसलाधार बारिश के चलते प्रदेश भर में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहे भूस्खलन और मलबा आने से राष्ट्रीय राजमार्गों समेत दर्जनों ग्रामीण संपर्क मार्ग ठप पड़े हैं। प्रमुख नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 54 प्रमुख सड़कें पूरी तरह बंद हैं। वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है।
आपदा के आंकड़े: 45 की मौत, 55 लोग अभी भी लापता
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 29 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण 45 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 46 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त 55 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं।
आपदा की मार से जान-माल के साथ-साथ पशुधन और आवासीय भवनों को भी भारी क्षति पहुंची है। अब तक 789 बड़े पशु और 1216 छोटे पशु आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रदेश भर में 68 मकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, 23 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 40 आवासीय ढांचे ध्वस्त श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।
देहरादून और पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश का कहर
बीते 24 घंटों के दौरान देहरादून और पिथौरागढ़ जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई। राजधानी देहरादून के सहस्रधारा क्षेत्र में सर्वाधिक 91 मिमी बारिश हुई, जबकि मालदेवता में 82 मिमी, कालसी में 75 मिमी और माजरी क्षेत्र में 59 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
सीमांत जिले पिथौरागढ़ के बंगापानी क्षेत्र में 77 मिमी, डीडीहाट में 40.6 मिमी, थल में 24 मिमी, तेजम में 16 मिमी और धारचूला में 14.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। अन्य पर्वतीय जिलों में पौड़ी के कोटद्वार में 28 मिमी, यमकेश्वर में 25 मिमी, चमोली के गोपेश्वर में 21 मिमी और नैनीताल के हल्द्वानी में 30 मिमी बारिश दर्ज हुई।
54 सड़कें बंद: चमोली और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित
पहाड़ों पर जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के चलते राज्य में कुल 54 सड़कें यातायात के लिए अवरुद्ध हैं। इनमें 3 स्टेट हाईवे, 1 बीआरओ मार्ग, लोक निर्माण विभाग (PWD) की 12 सड़कें और 38 पीएमजीएसवाई व ग्रामीण मोटर मार्ग शामिल हैं।
चमोली: सबसे अधिक 16 मार्ग बाधित हैं। जोशीमठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग को सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद 10 टन तक के हल्के व मध्यम वाहनों के लिए अस्थायी तौर पर खोल दिया है।
पिथौरागढ़: 9 मार्ग बंद पड़े हैं, जिससे दूरदराज के गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
रुद्रप्रयाग व बागेश्वर: रुद्रप्रयाग में 8 ग्रामीण सड़कें और बागेश्वर में 7 मार्ग अवरुद्ध हैं।
अन्य जिले: देहरादून में 5, टिहरी में 3 और उत्तरकाशी में 2 मोटर मार्ग यातायात के लिए बंद हैं।
संबंधित विभागों और लोनिवि की टीमें जेसीबी और भारी मशीनों की मदद से मलबे को हटाकर सड़कों को बहाल करने में जुटी हुई हैं।
उफान पर नदियां: काली और गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब
लगातार हो रही बारिश के कारण प्रदेश की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा बैराजों और नदी तटों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है:
पिथौरागढ़ (काली नदी): काली नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 1.40 मीटर नीचे रह गया है, जिससे तटीय इलाकों में अलर्ट घोषित किया गया है।
हरिद्वार (गंगा नदी): गंगा का जलस्तर 291.60 मीटर पर पहुंच गया है, जो कि 294 मीटर के खतरे के निशान से 2.40 मीटर नीचे है।
उत्तरकाशी (भागीरथी नदी): भागीरथी का जलस्तर 1119.45 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के स्तर (1123 मीटर) से करीब 3.55 मीटर नीचे बह रही है।
चमोली: अलकनंदा 951.10 मीटर, नंदाकिनी 867.74 मीटर और पिंडर 768.96 मीटर पर बह रही हैं।
बागेश्वर (सरयू नदी): सरयू नदी 866.45 मीटर पर दर्ज की गई, जो खतरे के स्तर से 4.25 मीटर नीचे है।
बारिश के बीच सड़क हादसे: टिहरी में बस पलटी, 2 की मौत
खराब मौसम और फिसलन के बीच सड़क हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। टिहरी जिले के नरेंद्रनगर क्षेत्र में 28 अगस्त की रात 55 यात्रियों से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए और 7 को मामूली चोटें आईं। घायलों को तत्काल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जबकि 43 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया। उधर, देहरादून के चकराता क्षेत्र में भी एक वाहन दुर्घटना में 5 लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बनी हुई है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: 4 सितंबर तक राहत की उम्मीद नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तराखंड में 4 सितंबर तक बारिश का दौर लगातार जारी रहने की संभावना है:
30 अगस्त: प्रदेश के 10 पर्वतीय और मैदानी जिलों में भारी बारिश की संभावना।
31 अगस्त: देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल जिलों में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट।
1 सितंबर: देहरादून और टिहरी जनपदों में एक बार फिर मूसलाधार बारिश की चेतावनी।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय नागरिकों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें, नदी-नालों के पास न जाएं और मौसम के ताजा अपडेट के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें।
