Bageshwar Highway Landslide की ताजा घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन की मुश्किलों को उजागर कर दिया है। जनपद बागेश्वर के अंतर्गत गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रवाईखाल के समीप पहाड़ी से अचानक पत्थरों और मलबे की बरसात शुरू हो गई। इस कारण सड़क के दोनों छोर पर वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए। सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मार्ग बहाली के काम में तत्परता से जुट गई हैं, लेकिन व्यस्ततम समय पर मलबा हटाने की प्रक्रिया चलने से स्थानीय नागरिकों और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ी से लगातार गिरते बोल्डर और मिट्टी के कारण यहां सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। सड़क बंद होने के चलते आवश्यक सेवाओं की गाड़ियां भी घंटों जाम में फंसी रहीं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट योजना न होने के चलते यह समस्या रोजमर्रा की मुसीबत बनती जा रही है।
Bageshwar Highway Landslide के चलते लगा लंबा जाम
रवाईखाल के पास मार्ग बाधित होते ही सड़क के दोनों तरफ देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यह मार्ग बागेश्वर और गरुड़ घाटी को जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है। सुबह के समय जब यह मार्ग बंद हुआ, तो उस समय सड़कों पर दफ्तर, अस्पताल और बाजार जाने वालों की भीड़ सर्वाधिक थी।
वाहनों की कतार कई किलोमीटर तक फैल गई। स्थिति यह हो गई कि दुपहिया वाहनों को भी निकलने की जगह नहीं मिली। जाम में केवल निजी गाड़ियां ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन की बसें, टैक्सियां और आवश्यक सामान ढोने वाले छोटे-बड़े ट्रक भी फंसे रहे। यात्रियों को तेज धूप और उमस के बीच घंटों अपनी गाड़ियों में बैठकर मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ा।
मलबा हटाने की टाइमिंग पर Bageshwar Highway Landslide को लेकर भड़के लोग
सड़क पर मलबा गिरने से ज्यादा नाराजगी स्थानीय लोगों में बीआरओ के कार्य करने के समय को लेकर देखी जा रही है। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि जब सुबह का समय सबसे व्यस्त होता है, ठीक उसी दौरान भारी मशीनों (जेसीबी और पोकलेन) को सड़क पर उतार दिया जाता है। इससे रास्ता पूरी तरह सील हो जाता है और लोगों का रोजमर्रा का काम ठप पड़ जाता है।
स्थानीय निवासियों का तर्क है कि मलबा हटाने का काम किसी पूर्व निर्धारित समय सारिणी के तहत होना चाहिए। यदि सुबह के पीक आवर्स के बजाय समय का सही विभाजन किया जाए, तो लोग अनावश्यक रूप से सड़कों पर घंटों खड़े रहने से बच सकते हैं।
सुबह के व्यस्त समय में फंसे स्कूल और कर्मचारी
सुबह 8 बजे से 10 बजे का समय सबसे संवेदनशील होता है। इस दौरान:
- स्कूली बच्चे और वाहन: विभिन्न प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं समय पर विद्यालय नहीं पहुंच सके। कई वाहन जाम में फंसे रहने से बच्चों के अभिभावक परेशान रहे।
- स्वास्थ्य कर्मी: जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट और नर्सें जाम के कारण ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंच पाईं।
- सरकारी व निजी कर्मचारी: विभिन्न सरकारी विभागों, बैंकों और निजी प्रतिष्ठानों के कर्मचारी भी घंटों रवाईखाल के जाम में फंसे रहे, जिससे कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हुआ।
Bageshwar Highway Landslide से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप
इस भूस्खलन और लंबे जाम का सीधा असर क्षेत्र की सप्लाई चेन पर पड़ा है। बागेश्वर जिले के ग्रामीण और कस्बाई बाजारों में दूध, ताजी सब्जियां, फल और ब्रेड जैसी दैनिक उपभोग की चीजें समय पर नहीं पहुंच पाईं।
सब्जी और दूध के व्यापारियों का कहना है कि घंटों जाम में फंसे रहने के कारण पेरिसेबल सामान खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। समय पर बाजार न पहुंचने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को सामान की किल्लत और मनमाने दामों की मार झेलनी पड़ रही है। आपातकालीन सेवाओं के तहत यदि कोई गंभीर मरीज एंबुलेंस में हो, तो इस मार्ग पर फंसना उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का व्यावहारिक समाधान: समय सारिणी तय करे प्रशासन
ग्रामीणों ने बीआरओ और जिला प्रशासन के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है ताकि सड़क की मरम्मत भी चलती रहे और आवागमन भी पूरी तरह ठप न हो। लोगों का कहना है कि:
- सुबह 10 बजे के बाद शुरू हो काम: सुबह के पीक आवर्स (7:30 AM से 10:00 AM) के दौरान सड़क को केवल वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाए। इसके बाद सुबह 10 बजे से मलबा हटाने का काम शुरू किया जाए।
- अंतराल पर मिले निकास: काम लगातार चलाने के बजाय हर एक या दो घंटे के अंतराल पर 20 से 30 मिनट के लिए दोनों तरफ के वाहनों को निकाला जाए, जिससे जाम का दबाव न बढ़े।
- शाम 6 बजे के बाद हो बड़ा काम: शाम के व्यस्त समय के बीत जाने के बाद, यानी शाम 6 बजे से रात के समय भारी मशीनों से बोल्डर तोड़ने और मलबा पूरी तरह हटाने का काम तेजी से किया जाए।
Bageshwar Highway Landslide पर जल्द फैसला न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय निवासी विपिन जोशी, खीम सिंह ऐठानी, भास्कर तिवारी और मनोज कुमार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जिलाधिकारी ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
नागरिकों ने मांग की है कि जिलाधिकारी बागेश्वर तुरंत बीआरओ अधिकारियों के साथ बैठक कर मलबा हटाने की एक स्पष्ट और सार्वजनिक समय सारिणी जारी करें। यदि प्रशासन ने इस मांग की अनदेखी की और अव्यवस्थित तरीके से मार्ग बंद करने का सिलसिला जारी रहा, तो स्थानीय जनता और व्यापारी मिलकर सड़कों पर उतरेंगे और चक्का जाम व उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
