Aman Sehrawat ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराते हुए भारतीय खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने वर्ल्ड चैंपियन नॉर्थ कोरिया के हांग चोंग सोंग को रोमांचक फाइनल मुकाबले में 11-7 से पराजित कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मैट पर शुरुआती मिनटों से ही दोनों पहलवानों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन अमन की फुर्ती, रक्षात्मक काउंटर और सटीक दांव-पेचों के सामने विपक्षी पहलवान पस्त नजर आए।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ अमन सहरावत एशियन गेम्स के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले पहले पहलवान बन गए हैं। दुनिया में 32वीं रैंकिंग पर रहते हुए उन्होंने शीर्ष वरीयता प्राप्त वर्ल्ड चैंपियन को जिस अंदाज में मात दी, उसने वैश्विक कुश्ती जगत को स्तब्ध कर दिया है।
Aman Sehrawat का फाइनल मुकाबला: 11-7 से दी वर्ल्ड चैंपियन को पटखनी
फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। नॉर्थ कोरिया के हांग चोंग सोंग ने पहले ही मिनट में अमन के पैरों पर हमला बोलकर अंक बटोरने की कोशिश की। अमन ने धैर्य और अनुभव का परिचय देते हुए न केवल उस अटैक को विफल किया, बल्कि शानदार काउंटर-अटैक करते हुए दो महत्वपूर्ण तकनीकी अंक जुटाए।
मुकाबले के दूसरे राउंड में सोंग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और स्कोर एक समय बेहद करीबी हो गया था। हालांकि, अमन सहरावत ने मैट के किनारे पर जबरदस्त ग्रैपलिंग और लेग-लेस तकनीक का इस्तेमाल कर लगातार चार अंक अर्जित किए। मैच समाप्त होने के अंतिम 30 सेकंड में अमन ने मजबूत डिफेंस बनाए रखा और स्कोरबोर्ड पर 11-7 की निर्णायक बढ़त बनाकर गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाल दिया। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में सोंग ने सिल्वर जीता था, जबकि अमन को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा था। इस बार अमन ने उस परिणाम को पूरी तरह पलट दिया।
छत्रसाल स्टेडियम और कोच ललित कुमार की भूमिका
अमन की इस बेमिसाल सफलता के पीछे वर्षों का कड़ा पसीना और त्याग छुपा है। दिल्ली के मशहूर छत्रसाल स्टेडियम में पले-बढ़े अमन को तराशने का काम मुख्य रूप से उनके कोच ललित कुमार ने किया। छत्रसाल की अखाड़ा संस्कृति ने हमेशा से देश को विश्वस्तरीय पहलवान दिए हैं, और अमन उसी परंपरा की अगली मजबूत कड़ी साबित हुए हैं।
कोच ललित कुमार ने अमन के फुटवर्क और आक्रामक ग्रैपलिंग स्टाइल पर खास ध्यान दिया। अंतरराष्ट्रीय मैट पर अमूमन 57 किग्रा वर्ग के पहलवान बेहद तेज गति से अटैक करते हैं। ललित कुमार ने अमन को सिखाया कि कैसे विरोधी के हमलों को अपनी ताकत में बदलकर तेजी से अंक बटोरे जाते हैं। मैच के बाद अमन ने अपने कोच के मार्गदर्शन और छत्रसाल स्टेडियम के अनुशासन को अपनी जीत का सबसे बड़ा आधार बताया।
अमन सहरावत का संघर्ष: बचपन में माता-पिता का साया उठा, कुश्ती बनी सहारा
अमन सहरावत का जीवन संघर्षों की जीती-जागती मिसाल है। हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहर गांव से ताल्लुक रखने वाले अमन जब महज 11 वर्ष के थे, तब उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। इतने गहरे पारिवारिक आघात के बाद किसी भी बच्चे का हौसला टूट सकता था, लेकिन अमन ने मैट को ही अपना परिवार और कुश्ती को अपने जीवन का एकमात्र मकसद बना लिया।
ओलिंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार की कुश्ती से प्रेरित होकर अमन ने जब पहली बार लंगोट बांधी, तब उनके पास सुविधाओं का अभाव था। लेकिन उनके भीतर कुश्ती के प्रति जो समर्पण था, उसने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। मैट पर उनका हर मुकाबला सिर्फ एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके अतीत के संघर्षों के खिलाफ एक जंग की तरह रहा है।
U-23 वर्ल्ड टाइटल से लेकर पेरिस ओलिंपिक 2024 तक का सफर
अमन के अंतरराष्ट्रीय करियर का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा है:
- 2022 U-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप: स्पेन में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अमन ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय पुरुष पहलवान बने थे।
- 2023 एशियन चैंपियनशिप: कजाकिस्तान के अस्ताना में अमन ने सीनियर एशियन चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल जीतकर सीनियर सर्किट में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
- पेरिस ओलिंपिक 2024: अमन ने प्यूर्टो रिको के डेरियन क्रूज को 13-5 से एकतरफा शिकस्त देकर 57 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। 21 साल और 24 दिन की उम्र में व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतकर वह भारत के सबसे युवा ओलिंपिक पदक विजेता एथलीट बने।
कुश्ती में उनके इन असाधारण योगदानों को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2024 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार से नवाजा था।
57 किग्रा वर्ग में भारत का दबदबा और भविष्य की राह
एशियन गेम्स 2026 का यह स्वर्ण पदक साबित करता है कि 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है। केडी जाधव, रवि दहिया के बाद अब अमन सहरावत ने इस भार वर्ग में भारत का दबदबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से कायम रखा है।
अमन की रणनीति, मैट अवेयरनेस और दबाव के पलों में शांत रहकर खेलने की क्षमता उन्हें अन्य पहलवानों से अलग बनाती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के इस गोल्ड मेडल ने आगामी 2028 लॉस एंजिल्स ओलिंपिक के लिए अमन की तैयारियों को नई ऊर्जा दी है, जहां देश को उनसे गोल्ड मेडल की पूरी उम्मीद रहेगी।
