रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड): विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम की पावन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग पर जंगलचट्टी के समीप महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों के साथ खच्चर चालकों द्वारा अभद्रता और हिंसक मारपीट की घटना घटित हुई। इस हमले में पीड़ित श्रद्धालु चोटिल हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनप्रयाग कोतवाली पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया और आरोपी अज्ञात खच्चर चालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।
जंगलचट्टी के पास संचालन को लेकर उपजा विवाद
घटनाक्रम के अनुसार, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से बाबा केदार के दर्शन की अभिलाषा लेकर आए मानजी वाधजी वाविया अपने साथी भानजी दामजी पटेल के साथ पैदल मार्ग से केदारनाथ की चढ़ाई चढ़ रहे थे। जब दोनों श्रद्धालु जंगलचट्टी क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी संकरे और चुनौतीपूर्ण मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन और आवाजाही को लेकर कुछ स्थानीय खच्चर चालकों के साथ उनकी कहासुनी हो गई।
आरोप है कि यह मामूली बहस देखते ही देखते तूल पकड़ गई। तीन खच्चर चालकों ने आपा खो दिया और श्रद्धालुओं के साथ गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने हाथ में लिए लाठी-डंडों से दोनों श्रद्धालुओं पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले में मुंबई निवासी दोनों यात्री संभल नहीं सके और उन्हें शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद अन्य तीर्थयात्रियों के बीच-बचाव के बाद हमलावर मौके से भाग निकले।
सोनप्रयाग कोतवाली में दी गई तहरीर, मुकदमा दर्ज
हमले के बाद आहत और भयभीत श्रद्धालु किसी तरह सोनप्रयाग पहुंचे और कोतवाली में पुलिस को आपबीती सुनाई। पीड़ित मानजी वाधजी वाविया की लिखित तहरीर के आधार पर सोनप्रयाग कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों अज्ञात खच्चर चालकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया।
मामले की जांच कर रहे विवेचना अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, पैदल मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण नंबर, टोकन और सेक्टर प्रभारियों के माध्यम से संदिग्ध संचालकों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यात्रियों के साथ मारपीट करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही उन्हें चिह्नित कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का सख्त रुख: “श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सामने आने के बाद रुद्रप्रयाग पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। जनपद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) निहारिका तोमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केदारनाथ धाम की यात्रा देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यात्रा मार्ग पर किसी भी तीर्थयात्री के साथ दुर्व्यवहार, अभद्रता या मारपीट जैसी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली हरकतों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसपी ने बताया कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों, चश्मदीदों के बयानों और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस ने यात्रा मार्ग पर तैनात सभी सुरक्षा चौकियों, सेक्टर मजिस्ट्रेटों और पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया है कि वे घोड़ा-खच्चर पड़ावों और संवेदनशील बिंदुओं पर नियमित निगरानी रखें ताकि यात्री खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
यात्रा मार्ग पर व्यवहार और नियमों की निगरानी
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में यात्री घोड़ा-खच्चरों और डंडी-कंडी का सहारा लेते हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा संचालकों के लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं कि वे यात्रियों से मर्यादित भाषा का प्रयोग करें, निर्धारित दरें ही वसूलें और संकरे मोड़ों पर संयम बरतें।
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने घोड़ा-खच्चर यूनियन के प्रतिनिधियों को भी चेतावनी दी है कि वे अपने श्रमिकों और चालकों के आचरण पर नजर रखें। यदि कोई संचालक आपराधिक कृत्य, मनमानी या हिंसा में लिप्त पाया जाता है, तो न केवल उसके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा, बल्कि यात्रा मार्ग पर उसका संचालन लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति भी की जाएगी।
सोनप्रयाग पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से धाम में मौजूद यात्रियों के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है, वहीं कानून का उल्लंघन करने वाले तत्वों को साफ संदेश मिला है कि देवभूमि में मर्यादा और कानून तोड़ने की कोई छूट नहीं होगी।
