उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर शिव भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है। विश्व प्रसिद्ध आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा का शंखनाद हो चुका है। इस वर्ष कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम किए हैं, ताकि वे हिमालय की गोद में छिपे इस आध्यात्मिक रहस्य के दर्शन सुगमता से कर सकें।
तीन अलग-अलग शहरों से होगी शुरुआत
इस बार की यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार तीन अलग-अलग प्रस्थान बिंदुओं (Starting Points) को चुन सकते हैं:
हल्द्वानी (8 मई): पहला दल हल्द्वानी से रवाना होगा। यह सबसे विस्तृत रूट है, जिसकी अवधि 8 दिन तय की गई है।
टनकपुर (9 मई): दूसरा विकल्प टनकपुर से है, जहाँ से 6 दिवसीय यात्रा संचालित होगी।
धारचूला (10 मई): जो श्रद्धालु सीधे पहाड़ों के करीब से यात्रा शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए धारचूला से तीसरा दल रवाना होगा।
यात्रा का मार्ग: आस्था और प्रकृति का संगम
KMVN के अनुसार, इस साल कुल 15 जत्थों में यात्रियों को ले जाया जाएगा। हल्द्वानी से शुरू होने वाली यात्रा का रूट बेहद आकर्षक है:
मुख्य दर्शन: पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी, ओम पर्वत और आदि कैलाश।
वापसी का मार्ग: लौटते समय श्रद्धालु पाताल भुवनेश्वर की रहस्यमयी गुफाओं, जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिरों, नीम करोली बाबा के कैंची धाम और भीमताल के सुंदर नज़ारों का आनंद ले सकेंगे।
पैकेज और किराया (प्रति व्यक्ति)
निगम ने यात्रियों के बजट और समय को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी किराया सूची जारी की है। इस राशि में आवास (Accommodation), शुद्ध सात्विक भोजन और स्थानीय परिवहन की सुविधा शामिल है:
कैसे करें बुकिंग?
प्रस्थान बिंदु यात्रा की अवधि अनुमानित किराया
हल्द्वानी 8 दिन ₹45,000
टनकपुर 6 दिन ₹42,000
धारचूला 5-6 दिन ₹35,000
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए KMVN की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यात्रा के लिए मेडिकल फिटनेस और परमिट अनिवार्य होते हैं, जिनकी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है।
विशेष नोट: आदि कैलाश यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं है, बल्कि यह हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच स्वयं को खोजने की एक यात्रा है। “छोटा कैलाश” के नाम से प्रसिद्ध यह स्थल साक्षात् शिव का निवास माना जाता है।
अगर आप भी इस साल भगवान शिव के इस पावन धाम की चौखट पर माथा टेकना चाहते हैं, तो अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दें। हिमालय की वादियाँ आपका आह्वान कर रही हैं!
