हल्द्वानी।हल्द्वानी को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना एक बार फिर नए मोड़ पर आ गई है। निजी भूमि के अधिग्रहण पर स्थानीय लोगों के तीव्र विरोध और भारी-भरकम मुआवजे की वजह से अब इस परियोजना को आबादी क्षेत्र से हटाकर जंगल की ओर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) अब पुराने प्रस्ताव के आधार पर रिंग रोड के सेक्टर-एक को वनभूमि से निकालने की तैयारी कर रहा है।
नए प्रस्ताव के तहत 18 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क के निर्माण के लिए करीब 56 हेक्टेयर वनभूमि का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से वनभूमि हस्तांतरण की स्वीकृति लेनी होगी। इस प्रक्रिया में लगभग 4280 पेड़ों के कटान की भी संभावना जताई जा रही है। लोनिवि के अनुसार इस खंड की अनुमानित निर्माण लागत 172 करोड़ रुपये है, जबकि यदि सड़क निजी भूमि से निकाली जाती तो केवल भूमि अधिग्रहण और भवनों के मुआवजे पर ही करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते।
परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), डिजाइन और तकनीकी अध्ययन तैयार करने के लिए अब एक निजी कंसल्टेंसी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके लिए शासन ने प्रथम चरण के बजट के तहत 26.35 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर और अंतिम डिजाइन के बाद वनभूमि का दायरा, पेड़ों की संख्या और कुल बजट में कुछ बदलाव संभव है।
गौरतलब है कि हल्द्वानी रिंग रोड की घोषणा अप्रैल 2017 में की गई थी। उस समय फिजिबिलिटी टेस्ट के लिए क्राफ्ट कंसलटेंसी नामक कंपनी को 1.57 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया था। लेकिन इसके बाद यह परियोजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2024 में लामाचौड़ से गन्ना सेंटर तक निजी भूमि से सड़क निकालने को लेकर दोबारा सर्वे शुरू हुआ, तो सितंबर में स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। धरना-प्रदर्शन और अनशन तक की स्थिति बन गई।
बाद में लोनिवि और प्रशासन ने निजी भूमि से रिंग रोड के एलाइमेंट को जोड़ने की संभावनाओं पर मुआवजे का आकलन कराया। रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 19 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण के साथ-साथ 105 भवनों का मुआवजा देना होगा, जिससे कुल लागत लगभग 700 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे ग्रामीणों का विरोध और तेज हो गया और मामला शासन स्तर तक पहुंचा।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अंततः यह तय किया गया कि रिंग रोड के सेक्टर-एक को वनभूमि से निकाला जाएगा, ताकि स्थानीय आबादी को कम से कम परेशानी हो। नए एलाइमेंट के अनुसार भाखड़ पुल से फायर लाइन के बगल से जंगल की सीमा के भीतर-भीतर रिंग रोड को रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास निकाला जाएगा।
चार सेक्टरों में प्रस्तावित है रिंग रोड51 किलोमीटर लंबी रिंग रोड को चार सेक्टरों में विभाजित किया गया है। सेक्टर-एक लामाचौड़ से गन्ना सेंटर तक, सेक्टर-दो गन्ना सेंटर से मोटाहल्दू तक, सेक्टर-तीन मोटाहल्दू से गौला बाईपास होते हुए नरीमन चौराहे तक और सेक्टर-चार नरीमन से गुलाबघाटी होकर पनियाली तक प्रस्तावित है। इनमें से सेक्टर-तीन का कार्य पहले ही एनएचएआई द्वारा किया जा चुका है। फिलहाल लोनिवि का पूरा फोकस सेक्टर-एक पर है, जिसे अब वनभूमि से निकालने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, अंतिम मंजूरी केंद्र सरकार के वन मंत्रालय से मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो पाएगी।
