न्यूयॉर्क/तेहरान: मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद, अब वाशिंगटन ने ईरान पर सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास का आरोप लगाया है।
ट्रंप की हत्या की साजिश और अमेरिका का रुख
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने UNSC के संबोधन में बेहद कड़े लहजे में कहा कि ईरानी शासन न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि वह अमेरिकी नेतृत्व को भी निशाना बना रहा है। वाल्ट्ज के अनुसार, ईरानी सरकार ने अपने प्रॉक्सी संगठनों और सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने की कई बार कोशिश की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान एक तरफ खुद को ‘पीड़ित’ बताता है और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन कर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। वाल्ट्ज ने कहा, “ईरान पिछले 47 वर्षों से ‘अमेरिका की मौत’ के नारे लगा रहा है। ट्रंप पर हमले की साजिश उसकी इसी नफरत का हिस्सा थी।”
खामेनेई की मौत और ईरान में तख्तापलट के संकेत
कल तड़के सुबह इजरायल और अमेरिका ने एक साझा अभियान के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों और सरकारी केंद्रों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत की पुष्टि की गई है।
माइक वाल्ट्ज ने इस सैन्य कार्रवाई को UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत ‘आत्मरक्षा’ में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि ईरानी जनता इस हमले से दुखी नहीं है, बल्कि सड़कों पर जश्न मना रही है। वाल्ट्ज के मुताबिक, ईरानी नागरिक दशकों के दमन के बाद अब अपनी ‘आजादी’ की उम्मीद देख रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में बदलता शक्ति संतुलन
अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि ईरान की गतिविधियां अब केवल इजरायल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिकी सैनिकों, उनके बेस और वैश्विक सहयोगियों के लिए सीधा खतरा बन गई हैं। शांतिपूर्ण समाधान की तमाम कोशिशों के बावजूद ईरान के असहयोग ने अमेरिका और इजरायल को इस निर्णायक सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
लेख के मुख्य बिंदु:
हमले की गंभीरता: इजरायल ने ईरान के कई शहरों में मिलिट्री बेस को तबाह कर दिया है।
हत्या की साजिश: अमेरिका का दावा है कि ईरान ने ट्रंप को मारने के लिए ‘प्रॉक्सी’ वॉर का सहारा लिया।
यूएन में बहस: अमेरिका ने इसे वैश्विक शांति के लिए उठाया गया ‘कानूनी कदम’ करार दिया।
निष्कर्ष
अयातुल्ला खामेनेई की मौत और ट्रंप पर हमले के खुलासे ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है। जहाँ एक तरफ ईरान में हमलों का दौर आज भी जारी है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि ईरान का अगला नेतृत्व क्या रुख अपनाता है। क्या यह मध्य-पूर्व में एक नए युग की शुरुआत है या फिर महायुद्ध की आहट? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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