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​देहरादून:

राजधानी देहरादून के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक दिल कहे जाने वाले घंटाघर के पास शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। चकराता रोड स्थित एक प्रसिद्ध फोटो लेमिनेशन की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना भयानक रूप ले लिया कि दुकान से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। इस घटना से पूरे इलाके में भगदड़ और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

​घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के व्यापारी और राहगीर मौके पर एकत्र हो गए। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, गनीमत यह रही कि हादसे के समय दुकान के भीतर कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा जनहानि का हादसा टल गया। हालांकि, दुकान में रखी लेमिनेशन मशीनें, केमिकल, कागज और अन्य कीमती सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गए हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

​सुबह-सुबह धू-धू कर जल उठी दुकान

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह जब बाजार की गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू ही हो रही थीं, तभी चकराता रोड पर स्थित फोटो लेमिनेशन की दुकान के भीतर से अचानक धुआं निकलता देखा गया। जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, तब तक धुएं का काला गुबार पूरी दुकान को अपनी आगोश में ले चुका था। देखते ही देखते दुकान के शीशे टूट गए और आग की भीषण लपटें बाहर की ओर निकलने लगीं।

​सुबह का समय होने के कारण सड़क पर वाहनों और लोगों की आवाजाही जारी थी। दुकान से उठती लपटों को देखकर राहगीरों में दहशत फैल गई। आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी-अपनी दुकानें खाली करनी शुरू कर दीं ताकि आग अन्य दुकानों तक न फैल सके।

​स्थानीय लोगों और पुलिस की मुस्तैदी

​घटना होते ही स्थानीय दुकानदारों ने बिना समय गंवाए पहले अपने स्तर पर पानी और अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। इसके साथ ही तुरंत स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग (Fire Brigade) को सूचना दी गई।
​सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले सुरक्षा के दृष्टिकोण से चकराता रोड के उस हिस्से पर यातायात को रोक दिया और लोगों की भीड़ को सुरक्षित दूरी पर हटाया। आग के विकराल रूप को देखते हुए दमकल की गाड़ियों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

​दमकल कर्मियों ने पाया आग पर काबू

​घंटाघर का इलाका बेहद सघन और व्यस्त माना जाता है। ऐसे में यदि आग आसपास की अन्य दुकानों या ऊपरी मंजिलों तक फैल जाती, तो नुकसान का दायरा बहुत बड़ा हो सकता था। दमकल कर्मियों ने बेहद सतर्कता और तेजी दिखाते हुए मोर्चेबंदी की और पानी की बौछारें शुरू कीं।
​करीब एक से डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अग्निशमन दल ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। दमकल अधिकारियों के अनुसार, समय पर मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई के कारण आग को पास की अन्य व्यावसायिक दुकानों में फैलने से रोक लिया गया।

​शॉर्ट सर्किट हो सकती है वजह, जांच जारी

​आग लगने का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। हालांकि, शुरुआती जांच और स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ हो सकता है।

​अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का कहना है:

​”प्राथमिक दृष्टि से आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट प्रतीत होता है। दुकान के भीतर भारी मात्रा में लेमिनेशन का सामान, प्लास्टिक, कागज और केमिकल मौजूद था, जिसने ईंधन का काम किया और आग बहुत तेजी से फैल गई। हम घटना के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रहे हैं।”

​लाखों रुपये का सामान जलकर खाक

​हालांकि घटना में किसी व्यक्ति के झुलसने या हताहत होने की खबर नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है, लेकिन दुकान मालिक को भारी वित्तीय चपत लगी है। दुकान में रखी महंगी लेमिनेशन मशीनें, प्रिंटर, कंप्यूटर सेटअप, फोटो फ्रेम, लैमिनेशन शीट और स्टॉक में रखा अन्य सामान पूरी तरह जलकर राख हो चुका है। संपत्ति के कुल नुकसान का सटीक आकलन पुलिस और प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

​सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

​इस घटना ने एक बार फिर राजधानी के व्यस्ततम बाजारों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों की याद दिला दी है। घंटाघर और चकराता रोड जैसे इलाकों में पुरानी इमारतें और आपस में सटी दुकानें हैं। ऐसे में बिजली की पुरानी वायरिंग और सुरक्षा उपकरणों की कमी किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बाजारों में बिजली के तारों की नियमित जांच की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
​फिलहाल, इलाके में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और यातायात को दोबारा सामान्य कर दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

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