संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक मंच पर पाकिस्तान को आईना दिखाया है। अफगानिस्तान की स्थिति पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों की तीखी आलोचना की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बिना नाम लिए इस्लामाबाद के “दोहरे मापदंडों” पर कड़ा प्रहार किया और स्पष्ट किया कि आतंकवाद को पालने वाले देश अब मासूमों के खून से अपनी राजनीति नहीं चमका सकते।
पवित्र महीने में खूनी खेल: भारत ने घेरा
पी. हरीश ने अपने संबोधन में विशेष रूप से रमजान के पवित्र महीने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर ‘इस्लामी एकजुटता’ और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की दुहाई देता है, वहीं दूसरी ओर इसी पवित्र महीने में वह अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।
भारत ने इन हमलों को ‘पाखंड की पराकाष्ठा’ करार दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक इन हमलों में 185 निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि मृतकों में लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन और निर्दोषों की हत्या को किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
आतंकवाद का ‘असली चेहरा’ बेनकाब
पाकिस्तान ने इन हमलों का बचाव करते हुए तर्क दिया था कि वह अपनी सुरक्षा के लिए आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस पर पलटवार करते हुए पी. हरीश ने कहा कि असलियत इसके विपरीत है। उन्होंने सीधे तौर पर संकेत दिया कि इस्लामाबाद खुद पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंकवादी समूहों को “हथियार” के रूप में इस्तेमाल करता है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि ISIS, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के खिलाफ एकजुट होना अनिवार्य है। विशेष रूप से ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) जैसे लश्कर के प्रॉक्सी संगठनों का जिक्र किया गया, जिन्होंने अप्रैल में पहलगाम में एक कायराना हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी।
अफगानिस्तान की कमर तोड़ती नाकेबंदी
बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र की उप विशेष प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने भी अफगानिस्तान के मानवीय संकट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सीमा बंदी के कारण अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
व्यापारिक संकट: पाकिस्तान द्वारा सीमाएं सील किए जाने के कारण अब व्यापार का एकमात्र विकल्प ईरान बचा है, लेकिन वहां भी संघर्ष के कारण रसद पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
महंगाई की मार: सीमाओं पर अस्थिरता के कारण अफगानिस्तान में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
अस्थिरता: दो प्रमुख सीमाओं पर जारी यह तनाव पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन गया है।
निष्कर्ष: भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने UNSC के मंच से यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और संप्रभुता का उल्लंघन साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सीमा पार आतंकवाद के मददगारों को जवाबदेह ठहराए। पाकिस्तान का “विक्टिम कार्ड” अब वैश्विक मंच पर काम नहीं कर रहा है, क्योंकि उसकी कथनी और करनी का अंतर अब सबके सामने है।
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