मुंबई, 10 मार्च 2026: मायानगरी मुंबई, जो अपनी रफ़्तार और जायकेदार स्ट्रीट फूड के लिए जानी जाती है, आज एक अभूतपूर्व संकट के मुहाने पर खड़ी है। ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश अब मुंबई के किचन तक पहुँच गई है। आलम यह है कि शहर के प्रसिद्ध रेस्तरां से दाल मखनी और रवा डोसा जैसे लजीज व्यंजन गायब होने लगे हैं। वजह स्वाद की कमी नहीं, बल्कि वो ईंधन है जिससे इन्हें पकाया जाता है—यानी कमर्शियल एलपीजी (LPG)।
मिडिल ईस्ट की जंग और मुंबई की थाली
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की कमर तोड़ दी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा गैस रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने के कारण उत्पादन ठप है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से भारत अपनी एलपीजी का बड़ा हिस्सा आयात करता है, वहां टैंकरों की आवाजाही बंद होने से संकट गहरा गया है। बेंगलुरु के बाद अब मुंबई में कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने हाहाकार मचा दिया है।
क्यों गायब हो रहे हैं खास व्यंजन?
मुंबई के दादर, अंधेरी और माटुंगा जैसे इलाकों के प्रतिष्ठित होटलों ने एक दर्दनाक फैसला लिया है। उन्होंने अपने मेन्यू को छोटा कर दिया है।
धीमी आंच का संकट: दाल मखनी और रवा डोसा जैसे व्यंजनों को तैयार करने में अधिक समय और गैस की खपत होती है।
बचत की रणनीति: गैस के सीमित स्टॉक को बचाने के लिए रेस्तरां मालिकों ने उन चीजों को बनाना बंद कर दिया है जो ‘स्लो कुकिंग’ मांगती हैं।
मेनू कार्ड में बदलाव: अब केवल वही डिशेज परोसी जा रही हैं जो कम समय और कम ईंधन में तैयार हो सकें।
72 घंटे का अल्टीमेटम: 50% रेस्तरां पर बंदी का खतरा
‘इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ (AHAR) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। एसोसिएशन के अनुसार, यदि अगले 72 घंटों के भीतर गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो मुंबई के 50% रेस्तरां पूरी तरह बंद हो सकते हैं। वर्तमान में, लगभग 20% होटल पहले ही ताले लटका चुके हैं।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
संकट को देखते हुए आहार (AHAR) का एक प्रतिनिधिमंडल आज महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल से मुलाकात करेगा।
प्राथमिकता कोटा की मांग: होटल इंडस्ट्री के लिए विशेष कोटा निर्धारित करने की मांग की जा रही है।
केंद्र से संपर्क: आहार अध्यक्ष विजय शेट्टी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
जमाखोरी का डर: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दावा है कि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन जमाखोरी रोकने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन को नियंत्रित किया जा रहा है, जिसका सीधा असर कमर्शियल सिलेंडरों पर पड़ा है।
आम आदमी और व्यापार पर असर
जहाँ घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति 25 दिनों की लॉक-इन अवधि के साथ जारी है, वहीं 19 किलो और 47 किलो के कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रविवार से पूरी तरह ठप है। इससे न केवल होटल मालिकों का नुकसान हो रहा है, बल्कि हजारों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडरा रहा है।
निष्कर्ष: मुंबई का खान-पान उद्योग इस समय अपनी सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं सुधरे या सरकार ने कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं निकाला, तो मुंबई की सड़कों पर मिलने वाली वो खुशबू कुछ समय के लिए शांत हो सकती है।
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