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प्रयागराज/वाराणसी: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों एक गंभीर कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण के आरोपों ने धार्मिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज हुए इस मामले में अब पुलिस की जांच की आंच वाराणसी तक पहुँचने की संभावना है।
जांच का दायरा और पुलिस की सक्रियता
ताजा जानकारी के अनुसार, प्रयागराज पुलिस की एक टीम पूछताछ के लिए वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ पहुँच सकती है। इस मामले में न केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बल्कि उनके कुछ शिष्यों से भी सवाल-जवाब किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि इस प्राथमिकी (FIR) में उनके शिष्य मुकुंदानंद का नाम भी शामिल है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कठोर कदम उठा सकती है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष: ‘साजिश का शिकार’
इन गंभीर आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर स्वामी रामभद्राचार्य पर झूठा केस दर्ज कराने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताते हुए उन्होंने कहा:
“मेरे खिलाफ गढ़ी गई पूरी कहानी अदालत में ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। असली अदालत जनता की होती है, और हम जनता की अदालत में जाकर अपनी सच्चाई रखेंगे।”
गिरफ्तारी की संभावना और कानूनी पेच
स्वामी जी के विधिक सलाहकार मदन मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि यदि पुलिस गिरफ्तारी के लिए आती है, तो वे पूरी तरह सहयोग करेंगे। हालांकि, उन्होंने एक तकनीकी बिंदु की ओर इशारा करते हुए कहा कि चूंकि मामला प्रयागराज का है और आश्रम वाराणसी में, इसलिए पुलिस को आरोपी को ले जाने के लिए मजिस्ट्रेट से ‘ट्रांजिट रिमांड’ या जर्नी वारंट लेना अनिवार्य होगा। फिलहाल, बचाव पक्ष उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकीलों से मशविरा कर रहा है।
मामले में लगी गंभीर धाराएं और सजा का प्रावधान
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की अत्यंत कठोर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है:
धारा विवरण संभावित सजा
BNS 351 (3) डराना, धमकाना या दबाव बनाना 2 से 7 साल कारावास
POCSO 5(i) / 6 पद का दुरुपयोग कर गंभीर यौन शोषण 20 साल से आजीवन कारावास
POCSO 3 / 4(2) बच्चे के साथ कुकृत्य 10 साल से उम्रकैद
POCSO 16 / 17 अपराध
निष्कर्ष
धर्म और कानून के इस टकराव ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। एक तरफ जहां पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य इसे अपने अपमान की कोशिश बता रहे हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की पूछताछ और कोर्ट की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी।

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