उत्तराखंड की राजनीति का मिजाज अक्सर यहाँ की बर्फीली वादियों के विपरीत बेहद गर्म रहा है। राज्य के 25 वर्षों के इतिहास में सत्ता की कुर्सी कभी भी कांटों से मुक्त नहीं रही। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए यह साबित कर दिया है कि वे ‘खामोशी’ से बड़े सियासी बदलाव करने के फन में माहिर हैं।
मिथकों को तोड़ता धामी का नया स्वरूप
देवभूमि की राजनीति में नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल बिना उथल-पुथल के पूरा नहीं कर सका। विपक्षी दल कांग्रेस अक्सर भाजपा पर बार-बार मुख्यमंत्री बदलने का आरोप लगाकर हमलावर रहती थी। लेकिन धामी ने मंत्रिमंडल की खाली सीटों को भरकर न केवल इन कयासों पर विराम लगाया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि वे अब अपनी सरकार को ‘फिनिशिंग लाइन’ की ओर मजबूती से ले जा रहे हैं।
यह विस्तार महज पदों को भरना नहीं है, बल्कि धामी के बढ़ते राजनीतिक कद का परिचायक है। विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व का उन पर अटूट भरोसा और अब अपनी पसंद की टीम चुनना, उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है।
चुनावी चक्रव्यूह और क्षेत्रीय संतुलन
2027 के विधानसभा चुनावों में अब कुछ ही समय शेष है। ऐसे में पांच नए मंत्रियों का शामिल होना सरकार में नई ऊर्जा फूंकने का काम करेगा। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है:
सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) पर लगाम: नए चेहरों के साथ जनता के बीच जाकर सरकार अपनी छवि को ताज़ा रखना चाहती है।
कार्यभार का बंटवारा: मुख्यमंत्री के पास विभागों का भारी बोझ था। इस विस्तार के बाद धामी अब प्रशासनिक फाइलों से निकलकर संगठनात्मक दौरों और प्रचार के लिए अधिक समय निकाल सकेंगे।
गुटबाजी पर लगाम: अमित शाह के हरिद्वार दौरे के बाद पार्टी में अनुशासन का जो संदेश गया था, यह विस्तार उसी की अगली कड़ी है। इसके जरिए पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की सफल कोशिश की गई है।
निष्कर्ष: मिशन 2027 की मजबूत नींव
भाजपा नेतृत्व का यह कदम दर्शाता है कि वे धामी सरकार के फैसलों और उपलब्धियों पर मुहर लगा चुके हैं। खाली पदों को भरने का निर्णय भले ही लंबे समय तक लटका रहा, लेकिन जब हुआ तो उसने विरोधियों के पास सवाल उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
अब उत्तराखंड की सड़कों पर सरकार के पुराने अनुभव के साथ-साथ नए मंत्रियों का जोश भी दिखाई देगा। खामोशी से हुआ यह विस्तार आने वाले चुनावों में एक बड़े शोर की आहट है, जो विपक्षी खेमे के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
