Demo

इस्लामाबाद/काबुल: दक्षिण एशिया में युद्ध की ज्वाला भड़क उठी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो चुका है। तालिबान (इस्लामिक अमीरात) के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को सनसनीखेज दावा किया कि उनकी वायु सेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर कई महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों पर सटीक एयरस्ट्राइक की है।
इस जवाबी हमले में पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया गया है, जिससे पाकिस्तानी सैन्य खेमे में हड़कंप मच गया है।
प्रमुख ठिकानों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
अफगान रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। तालिबान ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे को चोट पहुँचाने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला:
नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी): यहाँ पाकिस्तानी वायुसेना का मुख्य संचालन केंद्र है।
12वीं डिवीजन मुख्यालय (क्वेटा): बलूचिस्तान में स्थित सेना के इस बड़े बेस को निशाना बनाया गया।
ख्वाजाई कैंप (मोहम्मद एजेंसी): खैबर पख्तूनख्वा में स्थित इस सैन्य शिविर पर भी भारी बमबारी की गई।
रणनीतिक कमांड सेंटर: इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी पाक सेना के ठिकानों को नुकसान पहुँचाने का दावा किया गया है।
भारी नुकसान और मौतों का दावा
तालिबान के उप प्रवक्ता सेदुकुल्लाह नसरत ने मीडिया को जानकारी दी कि इन हमलों में पाकिस्तान के 32 सैनिक मारे गए हैं। साथ ही, अफगान सेना ने पाकिस्तान के दो अत्याधुनिक सैन्य ड्रोन्स को भी मार गिराने का दावा किया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इन हवाई हमलों से पाकिस्तानी एयरबेस और कमांड सेंटर्स की इमारतों और उपकरणों को व्यापक क्षति पहुँची है।
क्यों भड़की युद्ध की आग?
यह हमला कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान द्वारा की गई बमबारी का करारा जवाब था। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के काबुल और बगराम जैसे इलाकों में हवाई हमले किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया था।
तालिबान का कहना है कि उन्होंने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह “जवाबी कार्रवाई” की है। अफगानिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी धरती पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप या हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे और अब वे रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपना रहे हैं।
बदलते समीकरण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान द्वारा पाकिस्तानी वायु सीमा का उल्लंघन कर रावलपिंडी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों को निशाना बनाना, पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मुख्य बिंदु जो चिंता बढ़ा रहे हैं:
रावलपिंडी की सुरक्षा में चूक: सैन्य मुख्यालय (GHQ) के इतने करीब हमला होना पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती है।
तालिबान की बढ़ती वायु शक्ति: यह पहली बार है जब तालिबान ने इतने संगठित तरीके से हवाई हमलों को अंजाम देने का दावा किया है।
आम नागरिकों पर संकट: सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।
आगे क्या होगा?
वर्तमान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। पाकिस्तान की ओर से अभी इस हमले के नुकसान पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि पाक सेना भी बड़े जवाबी हमले की तैयारी कर रही है। यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।

Leave A Reply