Uttarakhand Rain Alert के बीच चारधाम हाईवे पर भूस्खलन का संकट
पर्वतीय जिलों में जारी बारिश से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उत्तरकाशी जिले में भारी बारिश के बाद गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है।
- गंगोत्री हाईवे: गंगनानी के निकट पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर गिरने से यातायात पूरी तरह रुक गया है।
- यमुनोत्री हाईवे: पालीगाड के पास सड़क धंसने और मलबा आने से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है।
मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NH बड़कोट) की टीमें भारी मशीनरी के साथ मौके पर तैनात हैं। लगातार गिरते मलबे के बीच टीमें हाईवे को खोलने में जुटी हैं, ताकि फंसे हुए तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
अलकनंदा और मंदाकिनी का बढ़ता जलस्तर
रुद्रप्रयाग जिले में बीते चौबीस घंटों के दौरान रुक-रुक कर हो रही बारिश से नदियों के प्रवाह में भारी उछाल दर्ज किया गया है। जिला आपदा परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, ऊखीमठ तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक 75 मिलीमीटर और जखोली में 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
नदी / स्थान
वर्तमान जलस्तर (मीटर)
चेतावनी स्तर (मीटर)
खतरे का स्तर (मीटर)
अलकनंदा नदी
625.80
626.00
627.00
मंदाकिनी नदी
624.95
625.00
626.00
गंगानगर गेज
800.18
–
–
गौरीकुंड गेज
1973.85
–
अलकनंदा नदी चेतावनी रेखा से मात्र 20 सेंटीमीटर और मंदाकिनी नदी मात्र 5 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा, तो दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर सकती हैं।
ग्रामीण सड़कों पर असर और संपर्क मार्ग बाधित
जिले के भीतर राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर वाहनों का संचालन सुचारू रखने का प्रयास किया जा रहा है, किंतु ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भूस्खलन का गहरा असर पड़ा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तीन सड़कें और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की पांच प्रमुख ग्रामीण सड़कें मलबा आने से बंद हो चुकी हैं। इन मार्गों के बंद होने से दर्जनों गांवों का तहसील मुख्यालयों से सीधा संपर्क टूट गया है। संबंधित कार्यदायी संस्थाएं जेसीबी मशीनों के जरिए मार्गों को बहाल करने में जुटी हैं।
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर
मौसम विभाग की चेतावनी और नदियों के उफान को देखते हुए राज्य और जिला स्तरीय आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय कर दिए गए हैं। जिलाधिकारियों ने सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों, पुलिस महकमे, स्वास्थ्य विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) को हाई अलर्ट पर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।
- संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी: नदी तटों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पुराने डेंजर जोन के आसपास बसे गांवों में लगातार मुनादी कराई जा रही है।
- राहत एवं बचाव दल: एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) को संवेदनशील स्थलों पर उपकरण सहित मुस्तैद रखा गया है।
- सूचना तंत्र की मजबूती: किसी भी अप्रिय घटना, मार्ग अवरोध या जलभराव की स्थिति में बिना किसी देरी के जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) को सूचना देने का आदेश दिया गया है।
यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए आवश्यक सुरक्षा दिशा-निर्देश
पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के अनिश्चित मिजाज को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और नदी किनारे रहने वाले स्थानीय नागरिकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
- अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम पूर्वानुमान की ताजा जानकारी लेने के बाद ही पर्वतीय मार्गों पर सफर शुरू करें।
- उफनती नदियों, प्राकृतिक नालों और जलप्रपातों के समीप जाने की भूल बिल्कुल न करें।
- भूस्खलन संभावित ढलानों और तीखे मोड़ों पर वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें।
- किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने अथवा जिला आपदा प्रबंधन हेल्पडेस्क से तत्काल संपर्क साधें।
